➤ कमांद में कंपनी खोलकर निवेशकों को 60-70 दिन में रकम दोगुनी करने का लालच
➤ शुरुआती निवेश पर कुछ घंटों में बढ़ी रकम दिखाकर तैयार करता था भरोसे का जाल
➤ पुलिस जांच में 22 लोगों का निवेश सामने आया, ठगी चार करोड़ से अधिक बताई जा रही
क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में आरोपी के नेटवर्क को लेकर पुलिस जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच के अनुसार आरोपी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश और नेपाल तक फैला हुआ था और वहां भी कथित तौर पर ठगी की गतिविधियों को अंजाम दिया जा चुका है। आरोपी मुख्य रूप से ऐसे स्थानों को निशाना बनाता था, जहां निवेशक आसानी से मिल सकें। इसके लिए वह शैक्षणिक संस्थानों के आसपास कार्यालय खोलकर लोगों को निवेश के लिए आकर्षित करता था। पुलिस के अनुसार, कार्यालय की लोकेशन भी निवेशकों को टारगेट करने की रणनीति का हिस्सा थी। शुरुआती दौर में निवेश करने वाले लोगों को खाते में बढ़ी हुई रकम दिखाई जाती थी, जिससे उन्हें योजना पर भरोसा होने लगता था। इसके बाद यही निवेशक अपने परिचितों को भी इसमें पैसा लगाने के लिए तैयार करने लगते थे। पुलिस को मिली शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर अब तक ठगी की रकम चार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
शुरुआती निवेश में दिखाता था बढ़ा हुआ मुनाफा
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी निवेशकों को अपने जाल में फंसाने के लिए एक खास तरीका अपनाता था। वह शुरुआत में निवेश करने वाले व्यक्ति के खाते में कथित मुनाफे के साथ बढ़ी हुई रकम दिखाई देता था। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति ने दो लाख रुपये निवेश किए, तो कुछ समय बाद उसके खाते में रकम बढ़ी हुई नजर आती थी। इससे निवेशक को लगता था कि पैसा वास्तव में क्रिप्टो ट्रेडिंग में लगाया गया है और उससे अच्छा मुनाफा हो रहा है।
बताया जा रहा है कि आरोपी कुछ मामलों में एक से दो घंटे के भीतर ही निवेश पर दोगुना मुनाफा दिखाई देता था। खाते में बढ़ी हुई रकम देखकर निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो जाता था। इसके बाद वे न केवल खुद अधिक पैसा लगाने लगते थे, बल्कि अपने परिचितों और रिश्तेदारों को भी इस कथित निवेश योजना से जोड़ने की कोशिश करते थे। इस तरह आरोपी को नए निवेशक जुटाने के लिए अलग से ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ता था।
60 से 70 दिन में रकम दोगुनी करने का दिया जाता था लालच
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने वर्ष 2025 में कमांद में कंपनी खोलकर निवेश संबंधी गतिविधियां शुरू की थीं। लोगों को कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनके निवेश की रकम 60 से 70 दिन में दोगुनी हो जाएगी। कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए तैयार किया जाता था।
शुरुआत में निवेशकों को उनके निवेश पर लाभ दिखाई देने के कारण पूरी योजना उन्हें वास्तविक और फायदे वाली नजर आती थी। यही भरोसा आगे चलकर बड़े निवेश का आधार बनता था। जब निवेशकों को अपने खाते में बढ़ी हुई रकम दिखाई देती थी, तो वे इसे कथित मुनाफे का प्रमाण मानकर और अधिक रकम लगाने लगते थे।
रकम जमा होने के बाद बदल जाता था पूरा खेल
जांच के अनुसार, जब पर्याप्त रकम निवेशकों से जमा हो जाती थी, तब आरोपी की ओर से वेबसाइट का सर्वर डाउन होने की बात कही जाती थी। इसके बाद निवेशकों के लिए अपनी रकम निकालना मुश्किल हो जाता था। धीरे-धीरे उन्हें न तो उनकी मूल निवेश राशि वापस मिलती थी और न ही वह कथित मुनाफा, जो शुरुआती दौर में उनके खातों में बढ़ा हुआ दिखाई देता था।
इस तरह शुरुआती चरण में भरोसा कायम करने और बाद में बड़ी रकम जमा होने के बाद भुगतान रोकने का तरीका कथित ठगी के पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा बताया जा रहा है। पुलिस अब शिकायतों, निवेश से जुड़े दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
22 लोगों के निवेश का विवरण सामने आया
पुलिस की जांच में अब तक करीब 22 लोगों के निवेश संबंधी विवरण सामने आए हैं। शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर मामले में ठगी की रकम चार करोड़ रुपये से अधिक होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, जांच आगे बढ़ने के साथ निवेशकों की संख्या और कथित ठगी की कुल रकम में बदलाव हो सकता है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने निवेशकों से रकम किस तरीके से हासिल की और अलग-अलग लोगों को किस तरह इस कथित योजना से जोड़ा गया। इसके अलावा यूपी और नेपाल तक बताए जा रहे नेटवर्क से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
महाराष्ट्र का रहने वाला है आरोपी
पुलिस के अनुसार, आरोपी मूल रूप से महाराष्ट्र का रहने वाला है, जबकि उसका ससुराल कांगड़ा जिले में बताया गया है। कमांद में कंपनी खोलने और वहां से निवेश संबंधी गतिविधियां संचालित करने की जानकारी भी जांच का हिस्सा है।
मामले में पुलिस अब उपलब्ध शिकायतों, दस्तावेजों और निवेश संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े थे और निवेशकों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
एसपी विनोद कुमार ने बताया कि मामले में नियमानुसार जांच जारी है। पुलिस जांच के आधार पर सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।



